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सकारात्मक सोच Think Positive, Be Positive.

 

सकारात्मक सोच

 

आपने अक्सर ऐसा देखा होगा कि अगर आप किसी मुसीबत से दूर भागते हैं, तो एकाएक आप जरूर उस मुसीबत में फंस जायेंगे। क्या आपने कभी इसके बारे में सोचा है कि ऐसा क्यों होता है? क्योंकि आपके मन में जो भी विचार आते हैं, उसके अनुसार आपका शरीर काम करने लगता है। इसलिए किसी भी कार्य को करने के लिए हमेशा सकारात्मक सोच रखनी चाहिए। यदि आपकी सोच नकारात्मक होगी तो आप अपने उद्देश्य में कभी सफल नहीं हो पायेंगे। अतः “Think Positive, Be Positive.” सकारात्मक सोच ऐसी ही एक कहानी है जिससे आपको जरूर प्रेरणा मिलेगी

 

बहुत समय पहले की बात है किसी जंगल में बहुत सारे पशु और पक्षी रहते थे। उन्ही सब में एक हिरनी भी थी। एक बार वह हिरणी गर्भवती हुई, उसके प्रसव होने का समय नजदीक आ चुका था। वह प्रसव के लिए सुरक्षित जगह की तलाश करने लगी। तभी उसने एक तेज धार वाली नदी के किनारे घनी झाड़ियों और घास के पास एक जगह देखी जो उसे प्रसव हेतु सुरक्षित स्थान लगा।

अब अचानक उसे प्रसव पीड़ा शुरू होने लगी, लगभग उसी समय आसमान में घनघोर काले बादल छा गए और बहुत तेज बिजली कड़कने लगी जिसके कारण जंगल मे आग भड़क उठी।

यह दृश्य देखकर हिरणी घबरा गयी उसने अपनी दायीं ओर देखा, लेकिन ये क्या वहां एक बहेलिया उसकी ओर तीर का निशाना लगाये हुए था, उसकी बाईं ओर भी एक शेर उस पर घात लगाये हुए उसकी ओर बढ़ रहा था अब वो हिरणी क्या करे ? वो तो प्रसव पीड़ा से गुजर रही है, अब उसके मन में बहुत सारे सवाल गूंजने लगे कि

अब क्या होगा ?
क्या वो सुरक्षित रह सकेगी ?
क्या वो अपने बच्चे को जन्म दे सकेगी ?
क्या वो नवजात सुरक्षित रहेगा ?
या सब कुछ जंगल की आग मे जल जायेगा ?
अगर इनसे बच भी गयी तो क्या वो बहेलिये के तीर से बच पायेगी ?
या क्या वो उस खूंखार शेर के पंजों की मार से दर्दनाक मौत मारी जाएगी ?
जो उसकी और बढ़ रहा है,
उसके एक तरफ जंगल की आग, दूसरी ओर तेज धार वाली बहती नदी, और सामने उत्पन्न सभी संकट, अब वो क्या करे ?

लेकिन फिर उसने अपना ध्यान अपने नव आगंतुक को जन्म देने की ओर केन्द्रित कर दिया।
फिर जो हुआ वो आश्चर्य जनक था !

कड़कती बिजली की चमक से शिकारी की आँखों के सामने अँधेरा छा गया, और उसके हाथों से तीर चल गया और सीधे भूखे शेर को जा लगा। बादलो से तेज वर्षा होने लगी और जंगल की आग धीरे-धीरे बुझ गयी। इसी बीच हिरणी ने एक स्वस्थ शावक को जन्म दिया।

दोस्तों ऐसा हमारी जिन्दगी में भी होता है, जब हम चारो और से समस्याओं से घिर जाते हैं, नकारात्मक विचार हमारे दिमाग को जकड़ लेते है, और कोई संभावना दिखाई नहीं देती, हमें कोई एक उपाय करना होता है।
उस समय कुछ विचार बहुत ही नकारात्मक होते हैं, जो हमें चिंता ग्रस्त कर कुछ सोचने समझने लायक नहीं छोड़ते।

ऐसे मे हमें उस हिरणी से ये शिक्षा मिलती है की हमें अपनी प्राथमिकता की और देखना चाहिए, जिस प्रकार हिरणी ने सभी नकारात्मक परिस्तिथियाँ उत्पन्न होने पर भी अपनी प्राथमिकता प्रसवपर ध्यान केन्द्रित किया, जो उसकी पहली प्राथमिकता थी। बाकी तो मौत या जिन्दगी कुछ भी उसके हाथ मे था ही नहीं, और उसकी कोई भी क्रिया या प्रतिक्रिया उसकी और गर्भस्थ बच्चे की जान ले सकती थी। उसी प्रकार हमें भी अपनी प्राथमिकता की ओर ही ध्यान देना चाहिए।

“जाको राखे साईयां मार सके ना कोय. बाल न बांका कर सके चाहे सब जग बैरी होय.”  

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