लक्ष्य का निर्धारण | Lakshy Ka Nirdharan | Inspirational Story In Hindi, Motivational Story In Hindi, शिक्षाप्रद कहानी | RT Motivation
एक अच्छा घर बनाने के लिए योजना की जरुरत होती है। इसी तरह जीवन को सफल बनाने के लिए हमारे पास एक योजना का होना बहुत जरुरी है। यदि हमारे पास लक्ष्य नहीं है तो हम अपनी जिंदगी में कभी सफल नहीं हो सकते हैं।
प्राचीन समय में एक आश्रम में एक आचार्य जी रहते थे। आचार्य जी के पास उनके तीन शिष्य थे। एक बार की बात है आचार्य जी अपने शिष्यों को धनुर्विद्या सिखाने के लिए एक तालाब किनारे ले गए। तालाब किनारे एक पेड़ की डाल पर जो तालाब की तरफ झुकी हुई थी, उन्होंने एक लकड़ी की चिड़िया बैठा दी और एक-एक करके अपने शिष्यों को बुलाकर कहा कि पानी में चिड़िया का प्रतिबिम्ब (परछाई) देखकर डाल पर रखी चिड़िया की आँख पर तीर से निशाना लगाना है।
आचार्य जी ने पहले शिष्य को बुलाया और बोले निशाना साधो और मुझे बताओ कि तुम्हे क्या दिखाई दे रहा है? शिष्य बोला – “मुझे पेड़ दिखाई दे रहा है, उसकी डालियाँ, पत्तियाँ, आकाश, चिड़िया तथा चिड़िया की आँख सब कुछ दिखाई दे रहा है।” आचार्य जी ने उसे वापस बुलाया अपने स्थान पर जाकर खड़े होने का निर्देश दिया। आचार्य जी ने यही प्रश्न दूसरे शिष्य से किया। दूसरा शिष्य बोला – “मुझे वृक्ष की डालियाँ, पत्तियाँ, आकाश, चिड़िया तथा चिड़िया की आँख दिखाई दे रही है।” आचार्य जी ने उसे भी वापस बुलाया अपने स्थान पर जाकर खड़े होने का निर्देश दिया। आचार्य जी ने अब वही सवाल तीसरे शिष्य से भी दोहराया, कि लक्ष्य साधने के बाद उसे क्या दिखाई दे रहा है? तीसरे शिष्य ने कहा – “मुझे सिर्फ चिड़िया की आँख दिखाई दे रही है।” यह सुनकर आचार्य जी बहुत खुश हुए और बोले “बहुत अच्छे”, अब तुम चिड़िया की आँख पर निशाना लगाओ। शिष्य ने तीर छोड़ा और तीर सीधे चिड़िया की आँख पर जा कर लगा।
दोस्तों इस छोटी सी कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हमें भी अपने जीवन का लक्ष्य पहले से ही निर्धारित करके आगे बढ़ना चाहिए क्योंकि जब तक जिंदगी में सुनियोजित, लिखित एवं स्पस्ट लक्ष्य नहीं होगा तब तक हमें सफलता नहीं प्राप्त होगी। विश्व के सभी महान और सफल व्यक्तियों का कहना है कि उनकी सफलता का राज एक लक्ष्य रहा है, जो स्पस्ट एवं संशय रहित, वास्तविकता पर आधारित रहा है।

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