मौत
का भय
संसार
में शायद ही कोई प्राणी होगा जिसे अपनी मौत का भय न होता होगा। वैसे तो अनजाने में
कोई भी इन्सान कहीं भी बिना किसी भय के चला जाता है, लेकिन जब कोई आपको पहले ही सचेत
कर दे.… जैसे
कि आप किसी पुरानी हवेली में जा रहे हो और जाने से पहले कोई आपसे बता दे की वहाँ
भूत रहते है, तो
आपके दिमाग में अपने आप भय बैठ जायेगा। और आप वहाँ जाने से पहले ही मना कर देंगे
जबकि वहां कोई भूत-प्रेत नहीं है। ऐसी ही एक मछुआरे की कहानी है, जिसके
पूर्वजों और अब उसके पूरे परिवार की रोजी-रोटी का एक मात्र साधन समुद्र है।
बहुत समय पहले की बात है, रामेश्वरम
के पास एक गाँव में एक मछुआरा था। वह रोज मछली पकड़ने के लिए उफनते हुए समुद्र में
जाता था। यही उसकी दिनचर्या थी और रोजगार का एकमात्र साधन भी समुद्र ही था। एक दिन
वो समुद्र से मछली पकड़कर अपने घर वापिस आ रहा था तभी रास्ते में उसे एक मित्र
मिला। थोड़ी देर रूककर उन दोनों में आपस में काफी सारी बाते की।
कुछ इधर-उधर की बाते कर चुकने
के बाद उसने उस मछुआरे से पूछा तुम्हारे पिता हैं ? तो उसने कहा नहीं उन्हें एक बार
समुद्र में एक बड़ी मछली निगल गयी थी। इस पर उसने पुछा तुम्हारे बड़े भाई कहाँ हैं ? तो
उसने कहा एक बार समुद्र में आये किसी तूफान में उनकी नाव फंस गयी थी। तब से अब तक
वो वापस नहीं आये, शायद
उस समुद्री तूफान ने उनकी जान ले ली।
मित्र ने इस पर कहा जब तुम्हे
पता है कि समुद्र में इतना बड़ा खतरा है और तुम्हारे पूरे परिवार के विनाश का कारण है
भी यही समुद्र है। फिर क्यों तुम बराबर इसमें जाते हो ? क्या
तुम्हे मरने का डर नहीं है ?
मछुआरे ने जवाब दिया कि भाई मौत
का डर किसी को हो या न हो पर वो तो आयेगी ही जरा एक बात बताओ तुम्हारे परिवार में
से कितने लोग गये है जबकि उनमे से शायद ही कोई हो जो समुद्र की तरफ आया हो तो फिर
वो लोग कैसे चले गये ?
मौत के विषय में कोई कभी नहीं
कह सकता कब आयेगी ? या
किस रूप में आयेगी तो जब कुछ निश्चित ही नहीं है मैं अनावश्यक क्यों डरूं ?
दोस्तों इस कहानी से हमें यही
सीख मिलती है की हमें किसी चीज से डरने के बजाय किसी भी कार्य को सतर्क रहकर करना
चाहिये। क्योंकि असावधानी से किये गये किसी भी कार्य में दुर्घटना कभी भी हो सकती
है। अगर डर की वजह से कोई अपना पेशा छोड़ देगा तो उसकी रोजी-रोटी कैसे चलेगी?
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