माँ अब तेरे हाथ नहीं जलेंगे
बहुत समय पहले की बात है एक गाँव में एक गरीब माँ और उसका 10 साल का लड़का रामू रहता था। दोनों माँ-बेटे एक-दूसरे से बहुत प्यार
करते थे। हर साल की तरह इस बार भी गाँव में मेला लगा था। गाँव के सारे बच्चे मेला
देखने की तैयारी बना रहे थे। रामू ने भी अपनी माँ से सब के साथ मेला देखने जाने की
इच्छा जताई। माँ ने सोचा कल मेरा बेटा मेले में जाएगा, उसके पास 10 रुपए तो हो, ये सोचकर माँ ने खेतो में काम करके शाम तक पैसे ले आई। बेटा स्कूल
से आकर बोला खाना खाकर जल्दी सो जाता हूँ, कल मेले में जाना है।
सुबह माँ से बोला
– मैं नहाने जाता हूँ, जल्दी से मेरे लिये खाना बना दो। माँ ने रोटी बनाई, दूध अभी चूल्हे पर था, माँ ने देखा बरतन पकडने के लिए कुछ नहीं है, उसने गर्म पतीला हाथ से उठा लिया, माँ का हाथ जल गया। बेटे ने गर्दन झुकाकर दूध रोटी खाई और माँ के
दिए हुए १० रूपये लेकर मेले में चला गया। मेले में पहुँचकर सभी बच्चे अपने-अपने
लिए खिलौने, मिठाइयाँ व अन्य वस्तुएँ खरीदीं।
रामू के पास केवल 10 रुपये ही थे और उसकी आँखों में अभी
भी उसकी माँ का जला हाँथ दिखाई दे रहा था।
अचानक मेले में
उसे एक दुकान में सँडसी दिखाई दी। रामू ने दुकानदार से उसकी कीमत पूछी, उसने बोला 10 रुपये। रामू ने तुरंत 10 रुपये देकर सँडसी खरीद ली। सारे बच्चे शाम को मेला देखकर घर वापस आ
गये। रामू शाम को घर आया, तो माँ ने पूछा- मेले में क्या देखा, 10 रुपए का कुछ खाया कि नहीं..!!
बेटा बोला – माँ आँखें बंद कर, तेरे लिए कुछ
लाया हूँ। माँ ने आँखें बंद की, तो बेटे ने उसके
हाथ में गर्म बरतन उठाने के लिए लाई सांडसी रख दी और बोला माँ अब तेरे हाथ नहीं
जलेंगे। यह सुनकर माँ की आँखों से आँसू बहने लगे और उसने बेटे को हृदय से लगा
लिया।
दोस्तों, माँ के चरणों मे स्वर्ग है, कभी उसे दुखी मत करो। सब कुछ मिल जाता है, पर माँ दोबारा नहीं मिलती।। वहीँ दूसरी तरफ हर इंसान को पैसों का
सदुपयोग करना चाहिये। जैसे की रामू ने किया है। अगर ये कहानी अच्छी लगे तो Comment करना मत भूलिये।
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