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गधे की सूझ बुझ || Motivational Story in Hindi

 गधे की सूझ बुझ || Motivational Story in Hindi 



कहते है जब किसी का बुरा समय आता है तो उसके अपने भी साथ नहीं देते है, और सबके साथ मिलकर आपके ऊपर कीचड़ भी उछालने से नहीं चूकते हैं। आप चाहे उनके लिए कुछ भी कर चुके हों लेकिन वह पुरानी सारी बातें भूलकर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं। ऐसी ही एक कहानी एक किसान और उसके गधे की है। जो गधा पूरी जिंदगी किसान के लिये काम करता रहा वह किसान भी उसका साथ छोड़कर उसको जीवित ही मिट्टी में दफना देने में कोई कसर नहीं छोड़ता!




बहुत समय पहले की बात है। किसी गांव में एक किसान रहता था, उसके पास एक गधा भी था। जिसके सहारे किसान की रोजी-रोटी चलती थी। किसान अपने गधे से बहुत प्यार करता था क्योकि वह किसान कि रोजी-रोटी का एक मात्र सहारा था और किसान की हर बात था। अब गधा काफी बूढ़ा हो चुका था उसमे पहले जैसी ताकत और काम करने की क्षमता नहीं रह गई थी।



एक दिन की बात है गधा रास्ते से भटक गया और वह एक पुराने खँडहर जैसे कुएँ में गिर गया। वह गधा घंटों ज़ोर-ज़ोर से रोता और चिल्लाता रहा। किसान ने गधे की आवाज सुनी और उसने देखा कि उसका गधा कुँए में गिर गया है लेकिन उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि अब वह गधे को कुएं से बहार कैसे निकाले ? किसान गधे की चीख सुनता रहा और विचार करता रहा कि उसे क्या करना चाहिऐ और क्या नहीं ?





अंततः उसने निर्णय लिया कि चूंकि गधा काफी बूढा हो चूका है, अतः उसे बचाने से कोई लाभ होने वाला नहीं है; और इसलिए उसने गधे को कुएँ में ही दफना देने का निर्णय लिया। किसान ने अपने सभी पड़ोसियों को मदद के लिए बुलाया। सभी ने एक-एक फावड़ा पकड़ा और कुएँ में मिट्टी डालनी शुरू कर दी। जैसे ही गधे कि समझ में आया कि यह क्या हो रहा है, वह और ज़ोर-ज़ोर से चीख़-चीख़ कर रोने लगा। कुछ देर तक चिल्लाने के बाद फिर, अचानक वह आश्चर्यजनक रुप से शांत हो गया।

सब लोग चुपचाप कुएँ में मिट्टी डालते रहे। थोड़ी देर तक मिट्टी डालने के बाद किसान से रहा नहीं गया और उसने एक बार कुएँ में झाँका तो वह आश्चर्य से सन्न रह गया। उसने देखा कि अपनी पीठ पर पड़ने वाले हर फावड़े की मिट्टी के साथ वह गधा एक आश्चर्यजनक हरकत कर रहा था। वह हिल-हिल कर उस मिट्टी को नीचे गिरा देता था और फिर एक कदम बढ़ाकर उस पर चढ़ जाता था।



जैसे-जैसे किसान तथा उसके पड़ोसी उस पर फावड़ों से मिट्टी गिराते वैसे-वैसे वह हिल-हिल कर उस मिट्टी को गिरा देता और एस सीढी ऊपर चढ़ आता। जल्दी ही सबको आश्चर्यचकित करते हुए वह गधा कुएँ के किनारे पर पहुंच गया और फिर कूदकर बाहर भाग गया।


दोस्तों आपके जीवन में भी बहुत से लोग आप पर तरह-तरह कि मिट्टी फेकेंगे तथा फेंकने की कोशिश करेंगे, बहुत तरह कि गंदगी आप पर भी गिरेगी। जैसे कि, आप को आगे बढ़ने से रोकने के लिए कोई बेकार में ही आपकी आलोचना करेगा, कोई आपकी सफलता से ईर्ष्या के कारण आपको बेकार में ही भला-बुरा कहेगा। ऐसे में आपको हतोत्साहित होकर कुएँ में ही नहीं पड़े रहना है बल्कि जैसे गधे ने सूझ-बूझ दिखाई उसी साहस और सूझ-बूझ के साथ आपको भी हिल-हिल कर हर तरह कि गंदगी को गिरा देना है और उससे सीख लेकर, उसे सीढ़ी बनाकर, बिना अपने आदर्शों का त्याग किये अपने कदमों को आगे बढ़ाते जाना है

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